भारत का एकमात्र विष्णु मंदिर जहां भगवान कछुए के रूप में पूजे जाते हैं और एक राजा की कथा जुड़ी है
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में स्थित यह अनोखा विष्णु मंदिर भगवान विष्णु के कछुए रूप की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर राजा श्वेत चक्रवर्ती की कथा से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी गलती के पश्चाताप में भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। भगवान ने कछुए के रूप में प्रकट होकर एक तालाब बनाया, जहां स्नान से राजा का शरीर पुनः स्वस्थ हुआ। मंदिर परिसर में सैकड़ों जीवित कछुए भी देखे जा सकते हैं।
भारत में अनेक मंदिर हैं जहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, लेकिन आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में स्थित एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां भगवान विष्णु को इंसान के रूप में नहीं बल्कि कछुए के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके पीछे एक रोचक और गहरी कथा भी जुड़ी हुई है।
राजा श्वेत चक्रवर्ती की कथा
यह मंदिर राजा श्वेत चक्रवर्ती की कहानी से जुड़ा है। राजा श्वेत चक्रवर्ती एक शक्तिशाली शासक थे, जिनकी पत्नी रानी विष्णुप्रिया थी। एक दिन रानी विष्णुप्रिया और वे मश धारा नदी के किनारे भगवान विष्णु की घोर तपस्या में लीन थीं। इस दौरान राजा श्वेत चक्रवर्ती कामवासना में अंधे होकर उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास करने लगे।
रानी ने उन्हें मना किया, लेकिन राजा ने मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं और रानी को छूने की कोशिश की। तभी मश धारा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया। पानी की एक विशाल लहर उठी और राजा को उठाकर दूर चट्टानों पर पटक दिया। इस घटना के बाद राजा का शरीर भयानक फोड़े और घावों से भर गया।
राजा का पश्चाताप और भगवान विष्णु का अवतार
अपनी गलती का एहसास होने पर राजा श्वेत चक्रवर्ती ने वहीं बैठकर भगवान विष्णु की कठोर तपस्या शुरू कर दी। उनकी तकलीफ और सच्चे पश्चाताप को देखकर भगवान विष्णु ने एक विशाल कछुए के रूप में प्रकट होकर राजा की सहायता की।
भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से धरती पर प्रहार किया, जिससे एक तालाब बना जिसे आज श्वेत पुष्करिणी के नाम से जाना जाता है। इस तालाब में स्नान करने से राजा का शरीर पुनः सोने जैसा चमकने लगा और वे स्वस्थ हो गए।
मंदिर और कछुए
भगवान विष्णु ने राजा की प्रार्थना पर स्वयंभू कछुआ रूपी शिला बनकर इस स्थान को पवित्र कर दिया। यही वह मंदिर है जहां भगवान विष्णु को कछुए के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में स्थित है और यहां का सबसे बड़ा जीवित प्रमाण मंदिर परिसर में घूमते सैकड़ों असली कछुए हैं।
यह कछुए भगवान विष्णु के इस दुर्लभ अवतार के प्रतीक हैं और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
निष्कर्ष
श्रीकाकुलम का यह विष्णु मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक अनोखी कथा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। राजा श्वेत चक्रवर्ती की कहानी हमें पश्चाताप, तपस्या और भगवान की कृपा की महत्ता सिखाती है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के कछुए रूप की पूजा एक अद्वितीय धार्मिक अनुभव प्रदान करती है।
यदि आप कभी आंध्र प्रदेश जाएं, तो इस मंदिर का दर्शन अवश्य करें और भगवान विष्णु के इस अनोखे रूप को देखें। भक्तों के लिए यह स्थान श्रद्धा और आस्था का केंद्र है।
जय कूर्मनाथ!




















